जरा साल प्रियंका चोपड़ा के लिए खास नहीं रहा, सिर्फ एक फिल्म रिलीज हुई सात खून माफ, जो कि बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। हां, नए साल की शुरूआत अच्छी कही जा सकती है प्रियंका के लिए। डॉन2 चल निकली। हालंाकि यह शाहरूख की फिल्म थी, मगर प्रियंका ने अपने अभिनय से दर्शकों को निराश नहीं किया।
दिलचस्प बात यह है कि इन दिनों प्रियंका की जितनी चर्चा उनकी फिल्मों को लेकर नहीं हो रही है, उससे कहीं ज्यादा सुर्खियों में हैं वो अपने म्यूजिक एलबम को लेकर...। इस एलबम में उनके साथ लेडी गागा भी होंगी। जिस तरह शकीरा ने कोलम्बिया से निकलकर पश्चिम में अपने हुनर का जलवा बिखेरा है, बस कुछ इसी तरह प्रियंका भी करना चाहती हैं। निजी जिंदगी, फिल्में और म्यूजिक एलबम को लेकर प्रियंका से एफएम की हुई खास बातचीत...
लॉस एंजिल्स में आपके पॉप एलबम की रिकॉर्डिग कैसी रही? ओह, बहुत प्रेशर था काम का। मुझे स्टूडियो के अंदर बंद कर दिया गया, जहां मैं लिख रही थी और गानों की रिकॉर्डिग करा रही थी। बस एक घंटे के लिए बाहर जाने का मौका मिलता।
लेडी गागा समेत आपने बहुत सारे दोस्त बनाए वहां पर? हंसी की बात यह है कि जब मैं लॉस एंजिल्स में थी उस समय वह भारत में थीं। उनका नेचर बहुत सपोर्टिव है। वह समझती हैं कि एक नया-नया कलाकार कैसा महसूस कर रहा होता है। यह पूरी तरह नई जगह और नई संस्कृति थी मेरे लिए। जिन कलाकारों से भी मेरा मिलना हुआ, उन सभी का रवैया मेरे प्रति सकारात्मक था। अपने उस समय और काम के बारे में सोचकर ही एक्साइटमेंट हो रहा है।
कुल मिलाकर कैसा अनुभव रहा? सीखने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। संगीत से मुझे शुरू से ही लगाव रहा है, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि संगीत प्रेम इतना गहरा हो जाएगा। यह जादू सरीखा है मेरे लिए। गाने लिखना बहुत पर्सनल था। मुझे लगता कि मेरे सभी गाने दर्द भरे हैं और आज लग रहा है कितना कुछ छिपा है मेरे अंदर। दरअसल हम जिस प्रोफेशन में हैं यहां दूसरे लोगों, किरदारों आदि से इतना मिलना होता है कि अपने आप का सामना करने का समय ही नहीं मिल पाता। ऎसे में जब कभी हमारी मुलाकात खुद से होती है, तो पता चलता है कि अरे यह तो मैं जान ही नहीं पाई।
अपने खुद के बारे में कुछ बताएं? मैं काफी रिजर्वड नेचर हूं। यहां तक की दोस्तों और परिवार के साथ भी बहुत ज्यादा नहीं खुलती। जब कविता लिखती हूं, तो जैसे अंदर से कुछ उमड़ पड़ता है। ऎसा नहीं है यह किसी शोष्ाण या कॉम्प्लेक्स की वजह से है, बल्कि जीवन का नकारात्मक पक्ष मुझ पर गहरा असर डालता है। बावजूद इसके कि मेरी जिंदगी हमेशा खुशियों और साधन सम्पन्नता से परिपूर्ण रही है। जिस काम को करने के लिए मुझे मना किया जाता है, वही काम मुझे जैसे मजबूर करने लगता है कि मैं उसे करूं।
दर्द, एकाकीपन और हार्टबे्रक के साथ कैसे डील करती हैं? रोती हूं...बहुत रोती हूं या फिर कविता लिखकर खुद को रिलैक्स कर लेती हूं।
क्या अच्छी कविता दिल टूटने के बाद ही निकलती है? लेखन किसी भी चीज से प्रभावित होने पर ही सम्भव होता है। निर्भर आप पर करता है कि आपको किसने प्रभावित किया है, हार्टबे्रक भी इसका एक कारण हो सकता है।
आपकी लाइफ का डार्क फेका? पापा की बीमारी के वक्त...यह बहुत ही मुश्किल समय था। कोई भी मानसिक तौर पर अपने पैरेन्ट्स, जो कि उसका सबसे मजबूत स्तम्भ होते हैं, को बीमार नहीं देख सकता। एक बेटी के लिए उसके पिता एक ऎसे शख्स होते हैं, जो उसके बॉयफ्रैंड को जरा भी पसंद नहीं करते...और उन्हें कमजोर देखना आपको हिलाकर रख देता है। ऎसा ही कुछ मैंने भी महसूस किया, उस समय।
संगीत की दुनिया में आना, क्या अपने पिता के सपने को साकार करना है? हां, यह सब मेरे लिए किसी उपलब्घि से कम नहीं। इसे लेकर मेरी कोई प्लानिंग नहीं थी। मानो किसी ने मुझे इस ओर खींचा और मुझे इसमें मजा आने लगा। इस सबसे मेरे पापा को बहुत खुशी मिली। उनके उत्साह को देख मुझे लगा मैं उनके सपने को जी रही हूं।
एलबम को लेकर आपकी क्या प्लानिंग है? एक बार फिर मैं न्यूकमर की तरह महसूस कर रही हूं। सबसे अधिक उत्साहित मैं यह सोचकर हो जाती हूं कि मैं जो कर रही हूं उसका दायरा बहुत बड़ा है। यहां केवल मेरे लिए ही नहीं, बल्कि हर किसी के लिए बहुत अवसर हैं। बहुत कुछ है करने को। बॉलीवुड हमारी पसंद और चीजों पर मानो एकाधिकार प्राप्त कर लेता है। उसके सिवा हम कुछ सोच ही नहीं पाते। यहां पॉप कल्चर नहीं है। यह भारतीय कलाकारों के लिए एक नया रास्ता हो सकता है। हमें केवल भांगड़ा तक ही सीमित रहने की जरूरत नहीं है। हमें इस तरफ भी ध्यान देना चाहिए कि लोग और क्या सुनना और देखना पसंद कर रहे हैं। शकीरा ने कोलम्बिया से निकलकर पश्चिम में अपना ट्रेंड शुरू किया, बस वैसा ही कुछ मैं भी करना चाहती हूं।
किसी तरह की दिक्कत हुई आपको? बहुत। सबसे बड़ी दिक्कत तो मेरे मूड की थी। अगर मेरा मूड खराब होता, तो राइटिंग का मन करता, सिंगिंग का नहीं। खुद को तैयार करना पड़ता गाने के लिए, क्योंकि मेरे पास सीमित समय था। मैं पांच फिल्मों में व्यस्त थी। डॉन टू, अग्निपथ, तेरी-मेरी कहानी, बर्फी और कृष्ा के सिक्वल में। एक महीने के भीतर ही मुझे वापस आना था, जबकि गाने के लिए आपको एकदम फ्री-माइंड होना जरूरी होता है, लिहाजा मुझे अपने मूड को लगातार व्यवस्थित करना पड़ रहा था। बीते बरस की उठापटक पर कुछ कहना चाहेंगी? पिछले साल मेरी एक ही फिल्म आई, सात खून माफ। यह बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, इस बात का दुख जरूर हुआ, लेकिन विशाल भारद्वाज ने मेरे काम की तारीफ की। मैं जानती हूं कि यह एक डार्क मूवी थी और ऎसी फिल्मों की ऑडियंस भी अलग होती है। मैं खुश हूं कि बतौर अभिनेत्री मुझे 21 से 60 साल की महिला का किरदार निभाने का मौका मिला, मेरे काम को पसंद किया गया। फिर भी इसकी असफलता से दुख हुआ।
खुद को चैलेंज करना पसंद है? केवल फिल्मों के मामले में ही नहीं, बल्कि मैं लाइफ में जो भी काम करती हूं, सभी में। खुद को चैलेंज करते रहना मुझे अच्छा लगता है। यही वजह है कि मैंने म्यूजिक के रूप में खुद के आगे एक चैलेंज रखा। हालांकि इस बारे में सोचकर ही मुझे डर लगने लगता। कितनी उम्मीदें हैं, अपने देश से... मैं पहली शख्स हूं, जो यह करने जा रही है।
एक इंटरव्यू में शाहिद ने आपकी बहुत तारीफ की? कोई भी मेरी तारीफ करता है, तो जाहिर तौर पर खुशी होती है। फिर शाहिद के तारीफ करने पर सवाल क्यों?
किस व्यक्ति को अपनी तारीफ सुनना पसंद नहीं होता?
एक इंटरव्यू के दौरान आप इसलिए उठकर आ गईं, क्योंकि शाहिद के साथ फोटो नहीं खिंचवाना चाहती थीं? मैं जिस ब्रैंड के लिए शूट कर रही थी उन्होंने इंटरव्यू को ब्रेक कर दिया, क्योंकि लाइट फेड हो गई थी। इस ब्रैंड के नेक्स शूट के लिए प्लानिंग होने लगी थी। मेरे बाहर आने को लोगों ने गलत तरीके से लिया। कुणाल कोहली की फिल्म तेरी मेरी कहानी के लिए मैं शाहिद के साथ शूटिंग कर रही हूं, तो एक फोटो क्लिक होने से मुझे क्या दिक्कत हो सकती है भला। शाहिद ऎसे शख्स हैं, जिन्हें मैं काफी समय से जानती हूं। हम दोनों में आपसी समझ बहुत अच्छी है।
शाहरूख के साथ एक बार फिर काम करना कैसा रहा? उन्होंने मुझे बहुत चिढ़ाया और गुस्सा दिलाते रहे।
कुछ खबरों की वजह से शाहरूख के साथ सम्बंध खराब हुए? भगवान का शुक्र है कि ऎसा कुछ होने से बच गया। नहीं तो इन खबरों की वजह से जरूर दिक्कत हो सकती थी, जो मेरे लिए वाकई दुखद होता। मैं जो भी करती हूं उसे हमेशा स्वीकार करती रही हूं, लेकिन जो मैंने किया ही नहीं उसे कैसे स्वीकार करूं? इस तरह की फालतू बातों से कई बार रिश्तों में दरार आ जाती है।
आपने उनसे बात की? हां, जब उनसे बात हुई, तो उन्होंने ऎसा कुछ शो नहीं किया। इसके लिए मैं उनकी आभारी हूं। वह काफी विनम्र हैं।
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