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Sunday, 01 August, 2010
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तोहफा आया, मिल नहीं पाया
Tuesday, March 09, 2010, 00:40 hrs IST
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नई दिल्ली। यूपीए सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विधायिका में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का तोहफा नहीं मिल सका।

बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण विधेयक सोमवार को भारी हंगामे और शोरगुल के बीच राज्यसभा में पेश तो हो गया, लेकिन इस पर न तो बहस हो सकी और न ही मतदान। दोनों सदनों में चंद सांसदों के विरोध के चलते राज्यसभा की कार्यवाही छह और लोकसभा की कार्यवाही 5 बार स्थगन के साथ मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई।

सरकार की चतुराई : सरकार ने "रणछोड़" की भूमिका अपनाते हुए महिला आरक्षण विरोधियों को बुरी तरह हैरान कर दिया और बेहद चतुराई से विधेयक पर होने वाली बहस के समय को स्थगन के फेरे में उलझा दिया।

विरोधी सदस्यों की संख्या करीब दर्जनभर थी और उन्हें काबू में करने के लिए राज्यसभा के करीब 36 मार्शल कोने-कोने में तैनात कर दिए गए थे। विधेयक पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय था और सरकार बिना बहस के इसे पारित करने का अभूतपूर्व कदम उठा कर गलत परम्परा डालने के पक्ष में नहीं दिख रही थी।

दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हुआ : लोकसभा में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव विधेयक विरोधी सांसदों की अगुवाई कर रहे थे। जनता दल (यू) तथा बहुजन समाज पार्टी के सदस्य भी विधेयक का विरोध कर रहे थे।

दोनों सदनों में सोमवार को कोई कामकाज नहीं हुआ और बार-बार कार्यवाही स्थगित की गई। राज्यसभा में छठी और आखिरी बार जब पीठासीन उपसभापति पीजे कुरियन ने कार्यवाही स्थगित की तो कोई हंगामा भी नहीं हुआ था। हंगामे के आसार ही दिख रहे थे।

चर्चा कराने का दबाव
बार-बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विभिन्न प्रमुख दलों भाजपा, वामपंथी दलों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ अपने कक्ष में बैठकें कीं।

भाजपा व वामदलों के विधेयक को समर्थन देने की घोषणा करने से सरकार आश्वस्त थी कि विधेयक पारित हो जाएगा, लेकिन इन दोनों दलों ने भी पलटी खाते हुए सरकार पर पहले चर्चा कराने का दबाव डाला। प्रधानमंत्री ने विधेयक को पारित कराने का तरीका निकालने के लिए शाम को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई।

विरोध क्यों
विरोधी दल विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ हैं। ये दल इस विधेयक में पिछड़े वर्गों और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं।

लालू व मुलायम ने समर्थन वापस लिया
इस बीच, महिला आरक्षण बिल का पुरजोर विरोध कर रहे सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी। सपा और राजद ने कहा है कि संख्याबल के नाम पर राजनीतिक डकैती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राजद और सपा सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है।
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