Daily News
Tuesday, 07 February, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
ये रोमांस झूठा है
Saturday, May 08, 2010, 10:47 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
Left
fm
Left
उन्होंने अपने लिए स्टारडम की एक अलग परिभाष्ाा गढ़ ली है। वो यदि आज पूरे गर्व के साथ कहते हैं कि वो रितिक रोशन हैं, तो उनका स्टारडम उनके इस कथन को सहज रूप से एक पुख्तगी देता है। ठीक भी है साल में एक फिल्म करने वाले किसी भी अभिनेता के लिए यह गर्व की बात हो सकती है। पिछले साल तो उन्होंने एक भी फिल्म नहीं की। सिर्फ जोया अख्तर की "लक बाय चांस" के एक गेस्ट रोल में दिखाई पड़े। इस साल वो धमाका करने के मूड में हैं। इस समय उनके नाम दो फिल्में "काइट््स" और "गुजारिश" है। उनकी सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उनके हिस्से में हिट फिल्में तो खूब आती हैं, मगर लैंडमार्क फिल्मों से वो हमेशा वंचित रहते हैं। "जोधा अकबर" जैसी फिल्में सिर्फ उनके स्टारडम को मजबूत करती हैं, इसे लैंडमार्क फिल्म कहना अतिश्योक्ति होगी। अब यह दीगर बात है कि उनकी हर नई फिल्म के साथ यह दावा किया जाता है कि वो एक लैंडमार्क फिल्म के तौर पर सामने आएगी, मगर हर बार एक हताशा ही हाथ आती है। ...तो क्या काइट्स से लैंडमार्क फिल्म की उम्मीद करना बेमानी होगी। देखा जाए, तो यह फिल्म अभी तक सिर्फ बारबरा और रितिक के रोमांस की खबरों की वजह से सुर्खियों में रही है। सच तो यह है कि ये रोमांस फिल्म को हाइप देने के लिए था...क्योंकि सबकी सुने-माने, तो ये रोमांस झूठा है...
मुंबई से दीप्ति अनिल की रिपोर्ट

फिल्म की हीरोइन के साथ रोमांस...
रितिक की फिल्में कई सारी वजहों से चर्चा का विष्ाय बन जाती है, जिनमें से एक है, रिलीज से पहले उक्त फिल्म की हीरोइन के साथ उनके रोमांस की खबरें। होटल जे.डब्ल्यू.मेरियट की लॉबी में एक खास मुलाकात के दौरान यह सवाल सुनकर वो हंस पड़ते हैं। उनका जवाब होता है,"ऎसी रोमांस की खबरों से मैं जरा भी अपसेट नहीं होता हूं। मेरी हर फिल्म के लिए ये बातें बहुत अच्छी साबित होती हैं। ऎसी सारी खबरों की सफाई मुझे सिर्फ पत्नी सुजैन के सामने देनी पड़ती है। आखिर आप कहां-कहां ऎसी खबरों की सफाई देते रहेंगे। फिर ग्लैमर वल्र्ड में आकर कोई भला रोमांस जैसे शब्द से कैसे बच सकता है। यही वजह है कि मैं ऎसी गॉसिप से दूर अपने परिवार में मस्त हूं।" तो क्या ऎसे गॉसिप फिल्म के प्रचार के लिए खास तौर से बनाए जाते हैं। इस बात पर रितिक थोड़ा गंभीर हो जाते हैं,"अरे नहीं यार, फिल्म की पब्लिसिटी के साथ ऎसी खबरों का क्या वास्ता। यह मसाला तो मीडिया खुद तैयार करता है। इसके लिए रीडर काफी हद तक जिम्मेदार है, जो ऎसी चटखारेवाली खबरें पढ़ने के लिए बेताब रहता है। फिल्म निर्माण के दौरान उसके लिए ऎसी खबरें बनने की संभावना ज्यादा आसान हो जाती हैं।"

खंडन करने से बचना चाहते हैं...
सितारों के "इलु-इलु" वाली खबरों को हाइप करने के लिए मीडिया किस कदर बेताब रहता है, सभी इस बात से वाकिफ हैं। इस प्रसंग में सितारों की सबसे बड़ी गलती यह है कि वो अक्सर ऎसी खबरों का जोरदार ढंग से खंडन करने से बचते हैं। अफेयर की खबर के सदर्भ में कुछ ऎसा सवाल पूछने पर उनका जवाब थोड़ा डिप्लोमेटिक होता है,"हमारी मुश्किल यह है कि फिल्म के रिलीज के समय ऎसी सारी खबरों को प्रचार का हिस्सा समझकर हमें अनदेखा करना पड़ता है। वैसे भी ऎसी खबरों का कहां-कहंा और कैसे खंडन करते रहे। काम की व्यस्तता के बीच यह एक बहुत झमेले वाला काम है। इसका प्रोसेस इतना लंबा होता है कि बेवजह की कटुता ना चाहते हुए भी आपका पीछा करने लगती है। इससे अच्छा तो यह है कि एकदम चुप होकर लोगों को ऎसी खबरें पढ़कर मजे लेने दीजिए।" वो बारबरा मोरी के साथ अपने ताजा अफेयर की खबर को चुटकी लेते हुए कहते हैं,"ऎसी खबरों का मजा आप भी क्यों नहीं लेते हैं। कुछ अखबारों ने तो यहां तक लिख डाला कि मैंने "काइट््स" को हाइप देने के लिए बारबरा के साथ अपने रोमांस को प्रमोट किया। उन लोगों को मैं यह याद दिला देना चाहता हूं कि इससे पहले की मेरी सारी फिल्में अपने दम पर चली हैं, इसलिए "काइट््स" को भी किसी गिमिक या स्कूप की जरूत नहीं है। मुझे यह सुनकर बहुत बुरा लगता है कि इसकी शूटिंग के दौरान मैं बारबरा मोरी पर कुछ ज्यादा मेहरबान था। मैं मानता हूं, बारबरा मेरी अच्छी दोस्त है। मीडिया ने इसमें ही अपना स्कूप ढूंढ़ लिया।
कैसी है "काइट््स"
वैसे "काइट््स" के प्रोमों से दो बातें एकदम साफ हो जाती है- पहला, यह पूरी तरह से रितिक की फिल्म है। इसमें दूसरे कलाकारों को कम ही मौका मिला है। रितिक इस दौर के सुपर स्टार हैं और इसके निर्माता भी हैं, इसलिए इस फिल्म में उनका हावी होना कोई नई बात नहीं है। दूसरी बात को नजरअंदाज करना बिल्कुल मुमकिन नहीं है। फिल्म की सम्पूर्ण प्रस्तुति से ऎसा लगता है कि उनकी पिछली फिल्म की तुलना में यह ओवरसीज दर्शकों की फिल्म ज्यादा लगती है। रितिक ऎसे सवालों का बड़ी सफाई से जवाब देते हैं," जैसा कि इन दिनों चलन है, इस फिल्म को भी एक ग्लोबल टच दिया गया है। बावजूद इसके यह पूरी तरह से भारतीय सोच की फिल्म है। मैं इसमें भी बहुत जुदा नजर आऊंगा। यह कोई नई बात नहीं है। "कहो ना प्यार है" से लेकर "जोधा अकबर" तक अपनी हर फिल्म में मैंने ऎसा ही किया है। लेकिन इस बार "काइट्स" में थोड़ी बात बदल गई है। असल में विदेशी अभिनेत्री बारबरा मोरी के नायिका होने की वजह से यह धारणा बनी है कि यह ओवरसीज को टार्गेट की गई है। मैं एकदम निçश्ंचत हूं, यह फिल्म देश-विदेश के दर्शकों को समान रूप से पसंद आएगी।" हालांकि वो इस साल "काइट््स" के अलावा भंसाली की फिल्म "गुजारिश" में भी दिखाई पड़ेंगे, लेकिन फिलहाल उनकी सारी चर्चा काइट्स के इर्द-गिर्द ही सिमट गई है। रितिक इसकी वजह बताते हैं,"भंसाली की फिल्म शायद ही इस साल रिलीज हो। इसकी सारी शूटिंग इस साल के अंत तक ही पूरी हो पाएगी। अभी हाल में महबूब स्टूडियो में इसका एक लंबा शूटिंग शेड्यूल हमने पूरा किया है। इस फिल्म के बारे में अभी ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा। "देवदास" और "ब्लैक" देखने के बाद से मैं भंसाली का फैन बन गया हूं। उनके साथ मैं एक फिल्म करना चाहता था। मैं मानता हूं कि "गुजारिश" की तुलना किसी भी दृष्टि से मेरी दूसरी फिल्मों से नहीं हो सकती।"
भाष्ाा दोस्ती की वजह बनी...
बारबरा और रितिक की दोस्ती की एक बड़ी वजह भाष्ाा को माना जा रहा है। खुद रितिक भी इस बात को कबूल करते हैं,"आपने ठीक फरमाया है, हमारे बीच दोस्ती की एक बड़ी वजह भाष्ाा भी रही है। सेट पर बारबरा स्पेनिश लैंग्वेज में बात करती थीं। भाष्ाा से ही जुड़ा उनकी दूसरी प्राब्लम यह थी कि वो अंग्रेजी स्पेनिश में बोलती हैं, इसलिए यूनिट के लोग उसकी अंग्रेजी कम ही समझ पाते हैं। इस बात को बात मैंने जल्द ही समझ लिया था, इसलिए मैं एक तरह से दुभाçष्ाया बन गया था। यहां तक कि डायरेक्टर अनुराग बसु के भी सारे निर्देश मैं ही बारबरा को समझता था। इसके चलते बारबरा से मेरी काफी बातें होती थीं। अब दो लोगों के बीच इतनी सारी बातें होंगी, तो दोस्ती होना स्वाभविक है।"
यादगार फिल्म का अभाव...
उनके हिस्से में हिट फिल्में तो कई आर्ई, पर उनके पास ऎसी फिल्में ना के बराबर हैं, जिन्हें यादगार कहा जा सके । उनके सामने यह जिज्ञासा रखने पर वो हंस पड़ते हैं," थोड़ा इंतजार कीजिए। अब मैं यादगार फिल्मों में ही काम करना चाहता हूं। मुश्किल यह है कि कमर्शियल सेट-अप में ऎसी फिल्मों के बनने की गुंजाइश बहुत कम है। जहां तक मेरे स्टारडम का सवाल है, मैं इस मामले में खुशनसीब हूं कि मेरे स्टारडम को बहुत आश्चर्यजनक ढंग से देखा जाता है। खुद मैं इसमें कोई आश्चर्य वाली बात नहीं देखता हूं। थोड़ा संयम और प्लानिंग के साथ इस तरह से अपने काम का लुत्फ सभी उठा सकते हूं।"
More Stories Top News
fm news थोड़ा, प्रैक्टिल हो जाओ प्रतीक
fm news रिश्तों की भूल-भुलैया
fm news अग्निपथ पर रितिक
fm news बनूंगी भारतीय शकीरा
fm news 70 एमएम प्लस 30 = ए फैक्टर
fm news उम्मीदें 2012
fm news क्या खोया क्या पाया
fm news मेरी प्रेमिका मेरी मनोचिकित्सक
fm news तू नहीं तो और सही
fm news इंसिक्योरिटी...नो यार
Copyright © Daily News. All rights reserved.