लखनऊ। यह पहली घटना नहीं है जब किसी मंदिर में भगदड़ से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई हो। हिमाचल के नैना देवी मंदिर में तीन अगस्त 2008 को हुई भगदड़ में 162 लोगों की मौत हो गई थी।
इसी तरह राजस्थान में जोधपुर के चामुंडा देवी मंदिर में हुई भगदड़ में 147 लोग मरे थे तथा 55 घायल हुए थे। गुजरात के श्रीनाथजी मंदिर में 20 दिसंबर 2009 को हुए हादसे में 10 लोगों की मौत हुई थी। भगदड़ का सबसे बड़ा हादसा इलाहाबाद के कुंभ में तीन फरवरी 1954 को हुआ था, जिसमें 800 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। पिछला दो साल मंदिरों में भगदड़ से हुई मौत का गवाह रहा है और इसमें 400 से ज्यादा लोगों की जान गई है और 200 से अधिक घायल हुए हैं। मध्यप्रदेश के गुना में अशोकनगर के करीला गांव में जानकी लवकुश मंदिर में 26 मार्च 2006 को हुई भगदड़ में नौ लोगों की मौत हो गई थी।
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