महंगाईसे आम आदमी त्रस्त है और निर्वाचित जनप्रतिनिघि महंगाई कम करने को लेकर केवल कागजी बयान दे रहे हैं। इससे न तो आम आदमी को राहत मिलती दिख रही है और न ही महंगाई की मार कम होती दिखाई पड़ रही है। महंगाई के मुद्दे पर संसद में भी हंगामा हो रहा है। इस हंगामे में आम आदमी की आवाज दब सी गई है। आम आदमी की पैरवी के नाम पर हंगामा करना किसी तरह न्यायोचित नहीं है। आम आदमी को पांच साल में सरकार चुनने का एक बार मौका मिलता है, तब हर दल आम आदमी के हितों की पैरवी का संकल्प लेते हैं। सरकार बनने के बाद आम आदमी को पूरी तरह भूला दिया जाता है, उसकी सुध लेने वाला कहीं कोई नजर नहीं आता है। महंगाई को नियंत्रित करने के कोई कारगर उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति बिगड़ जाएगी। नेताओं को सोचना चाहिए कि केवल बयानों से महंगाई नहीं रूकेगी। - रवि कुमार, पद्मावती कॉलोनी
नरेगा में भ्रष्टाचार नरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर आए दिन नेताओं के बयान मीडिया में आ रहे हैं। केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री डॉ. सी.पी.जोशी भी स्वीकार चुके हैं कि नरेगा में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या बन चुकी है। सवाल यह है कि जब सबको पता है कि इस महत्वपूर्ण योजना को भ्रष्टाचार की बीमारी खोखला कर रही है, तो इससे बचने का उपाय क्यों नहीं ढूंढ़ा जा रहा है। इस योजना को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने के लिए समय रहते सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो एक जनहितैषी योजना अनियमितता की भेंट चढ़ जाएगा। इस योजना को बचाने के लिए बुद्धिजीवी वर्ग को भी आगे आना चाहिए। - सरिता चौधरी, अर्जुनपुरा फाटक
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