सिटी रिपोर्टर. जयपुर। तीन दिन से चढ़े होली के रंग को चौथे दिन एग्जाम्स ने मात्र तीन घंटे में उतार दिया। बुधवार से शुरू हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के एग्जाम के बाद शहर के विभिन्न सेंटर्स पर स्कूल स्टूडेंट्स होली की मस्ती को भुलाकर सिर्फ और सिर्फ स्टडी के मूड में नजर आए। पहले दिन टैंथ का म्यूजिक और ट्वेल्थ के साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स ने फिजिक्स का पेपर दिया। स्टूडेंट्स के अनुसार फर्स्ट डे पेपर के डिफिकल्टी लेवल को देखते हुए शुरूआत तो अच्छी हुई है, लेकिन अब टेंशन बाकी सब्जेक्ट्स की है। शहर के 25 सेंटर्स पर 9513 स्टूडेंट्स के बैठने की व्यवस्था की गई। इसमें से 5391 बॉयज और 4122 गल्र्स ने फिजिक्स का पेपर अटेम्प किया। इनमें से अधिकांश ने कहा, पेपर बहुत ईजी था, लेकिन लैंदी होने के कारण टाइम कम पड़ गया। जेवियर्स के आयुष, प्रियंका और संजय पब्लिक स्कूल की चेतना, ज्योति ने कहा कि हमें और हमारे ज्यादातर फ्रेंड्स को कई क्वेश्चंस के आंसर आते हुए भी उन्हें छोड़ना पड़ा। सब्जेक्ट एक्सपट्र्स के अनुसार, जिन स्टूडेंट्स ने पेपर पूरा कम्पलीट किया होगा, वे 90 परसेंट प्लस मार्क्स स्कोर कर पाएंगे यानी 70 मार्क्स वाले इस पेपर में कम से कम 65 तक एस्पेक्ट कर सकते हैं।
केंद्रीय विद्यालय नं. 3 के स्टूडेंट हर्षवर्धन कामरा के अनुसारपेपर कॉन्सेप्चुअल था। पेपर लैंदी होने की वजह से दस मार्क्स का पेपर छूट गया। पेपर में दो और तीन मार्क्स के क्वेश्चंस ज्यादा टिपिकल लगे, जबकि पांच मार्क्स के तीन क्वश्चंस में दो बहुत ईजी थे। केवी 3 के सिद्धार्थ भार्गव ने बताया कि पेपर में थियोरिटिकल पार्ट काफी टफ था, जबकि प्रेक्टिकल पार्ट ईजी रहा। लगभग पूरा पेपर एनसीईआरटी के सिलेबस में से था। जय कुमार ने बताया कि पेपर काफी बैलेंस्ड था, लेकिन आंसर्स की डिस्क्राइब लिमिट ज्यादा होने से लगभग 90 प्रतिशत स्टूडेंट्स पेपर पूरा नहीं अटैम्प्ट कर पाए। केवी 3 के स्टूडेंट जितेंद्र शर्मा कहते हैं पेपर लैंदी है, इसलिए पहले से ही स्पीड बनाकर चला और पूरा अटेम्प किया। पेपर में मैग्निफिशिएंट इफैक्ट ऑफ करंट और कैपिसिटैंस चैप्टर के क्वेश्चंस काफी कॉन्सेप्चुअल और टफ भी लगे, लेकिन इलेक्ट्रोनिक डिवाइसेज का पांच मार्क्स का डेरिवेशन बिलकुल वही था जो हमें क्लास में समझाया गया था। इसके अलावा ऑप्टिक्स के क्वश्चंस भी बहुत ईजी थे। एक मार्क्स वाले क्वश्चंस ने बहुत घुमाया।
सीडलिंग स्कूल की स्टूडेंट साक्षी गांधी का कहती हैं कि पेपर ईजी तो, था लेकिन साथ ही साथ काफी लैंदी था। मेरा सात मार्क्स का पेपर छूट गया। मुझे न्यूमेरिकल्स का पार्ट काफी टफ लगा, जबकि डेरिवेशंस बहुत ईजी थे। सीडलिंग स्कूल की अपूर्वा अग्निहोत्री और प्रीति ने बताया कि पेपर काफी टफ था, सेट बी के जो क्वश्चंस सेट ए और सेट सी से अलग थे, वह काफी टिपिकल लगे। पेपर में चॉइस ने बहुत राहत दी। इसमें एक ईजी और एक टफ क्वेश्चन होने की वजह से टेंशन थोड़ी कम हो पाई। आयुष्ाी खंडेलवाल कहती हैं कि पेपर लैंदी होने के साथ साथ मुझे डिफिकल्ट भी लगा। पेपर मे 15 प्रतिशत डिफिकल्टी लेवल होता है, लेकिन मुझे यह परसेंटेज ज्यादा लगी। हालांकि मेरा पेपर छूट गया, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मेरे 55 से अबॉब मार्क्स आएंगे।
सेट ने बिगाड़ा सिस्टम सेंट जेवियर के सात्विक, रोमानी और संजय पब्लिक स्कूल की आकांक्षा, तृप्ति ने कहा कि पेपर के सेट ने पूरा सिस्टम बिगाड़ दिया। तीनों सेट्स में करीब चार से पांच क्वेश्चंस डिफरेंट थे। इनमें कहीं ईजी, तो कहीं टफ क्वेश्चंस थे। अब जिन्हें ए और बी सेट मिले, वो स्टूडेंट्स थोड़े टेंशन में रहे, क्योंकि सी सेट काफी ईजी था। सी सेट वाले स्टूडेंट्स ने टाइम से पहले पेपर पूरा लिया, वहीं ए और बी वाले आखिर तक लिखते रहे।
बी सेट रहा टफ यहां एग्जाम देने आए सेंट सोल्जर स्कूल के रक्षित, प्रशांत, सुशोभित और सौरभ के अनुसार पेपर पैटर्न होपफुली था। पेपर के ए, बी, सी तीन सेट थे, जिनमें से सी सेट सबसे ईजी था। इंडो भारत स्कूल की रिमझिम और मृगविजया कहती हैं कि हमारे पास बी सेट था। हमारे अकॉर्डिüग पेपर क्वाइट ईजी रहा। दो मार्क्स वाले क्वेश्चंस को डिस्क्राइब करने में टाइम ज्यादा लग गया, इसलिए लास्ट में कुछ क्वेश्चंस को सही समय नहीं दे पाए।
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