जयपुर । हाईकोर्ट ने शहर में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए जयपुर नगर निगम और जिला प्रशासन को तीन हफ्ते में पॉलिसी व गाइडलाइन बनाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने रिहायशी इलाकों में बिना भू-रूपांतरण के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा है।
मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला व न्यायाधीश मनीष भंडारी ने यह अंतरिम आदेश प्रमोद नारायण माथुर व राजस्थान जनसतर्कता समिति की जनहित याचिकाओं पर बुधवार को दिए। अदालत के आदेश पर नगर निगम के सीईओ ललित मेहरा और एडीएम लोकनाथ सोनी बुधवार को अदालत में उपस्थित हुए। निगम की ओर से कहा गया कि लाइसेंस के तहत ध्वनि प्रदूषण के मानकों की पालना की शर्त होती है।
अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि बार-बार चालान होने के बाद भी लाइसेंस क्यों जारी किए जाते हैं। अदालत ने रिहायशी इलाकों में चलने वाले रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन आदि में देर रात तक म्यूजिक सिस्टम आदि बजाए जाने पर भी नाराजगी जताते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सरकार व निगम को कहा है कि रात 10 बजे बाद डीजे, पटाखे, ढोल आदि नहीं बजाए जाएं व ध्वनि प्रदूषण करने वाले मैरिज गार्डन आदि के लाइसेंस स्वीकृत नहीं किए जाएं। अदालत ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि 24 फरवरी को अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में रात 10 बजे बाद ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना नहीं होने और रात 10 बजे बाद ध्वनि प्रदूषण नहीं रोकने पर संबंधित थाना इलाके के सर्किल ऑफिसर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा। अदालत ने आदेश की पालना के लिए डीजीपी को जिम्मेदारी दी थी।
इनका कहना है
कोलाहल अधिनियम के तहत नगर निगम को सीधी कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है। अगर संबंधित थाना क्षेत्र का डीवाईएसपी रिकमंड करता है तो नगर निगम उस विवाह स्थल का लाइसेंस रद्द कर सकता है। हालांकि पिछले छह महीने के दौरान ऎसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।- के.जी. गोयल, राजस्व आयुक्त, नगर निगम
कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत रात 10 बजे बाद ऎसे आयोजनों की अनुमति नहीं दी जाती। उल्लंघन होता है कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है।- लोकनाथ सोनी, एडीएम सिटी दक्षिण
कानूनी पहलू और कार्रवाई
* सुप्रीम कोर्ट दो अलग-अलग मामलों में रात दस बजे बाद किसी भी स्थिति में ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर रोक लगा चुका है। * ध्वनि प्रदूषण (नियमतिकरण व नियंत्रण) नियम-2000 के तहत भी रात्रि 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, म्यूजिक सिस्टम, ढोल आदि बजाने पर रोक है। * रात्रि 10 बजे से पूर्व सक्षम प्राधिकारी की इजाजत से ही लाउडस्पीकर, म्यूजिक सिस्टम आदि बजाए जा सकते हैं। * रिहायशी इलाके में बिना भू-रूपांतरण के व्यावसायिक गतिविधि संचालित होने पर नगर निगम संबंधित रेस्टोरेंट या मैरिज गार्डन का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही उक्त भवन को सीज भी कर सकता है। * ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर पुलिस केस दर्ज कर ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत अदालत में चालान पेश कर सकती है। अदालत सजा के तौर पर दोषी पर जुर्माना लगा सकती है। * जरूरत होने पर पुलिस प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी को बुलवाकर ध्वनि की तीव्रता नाप सकते हैं। * अदालत के आदेश की पालना नहीं होने पर अदालत संबंधित थाने के सर्किल ऑफिसर के खिलाफ अवमानना कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है। * सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2008 में फरहद के. वाडिया के मामले में कह चुका है कि शांति से जीने अधिकार नागरिकों का मूलभूत अधिकार है।
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