केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010-11 में प्रति व्यक्ति आय पचास हजार रूपए से अधिक हो गई है। ये आंकड़े गले नहीं उतर रहे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खुद देश में कुपोषण की शर्मनाक स्थिति को स्वीकार चुके हैं। देश के विभिन्न स्थानों पर किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश में एक वर्ग की आय में बेशुमार बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन अधिसंख्य लोगों की हालत खराब है। महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। दूसरी तरफ ऎसे आंकड़े परोसे जा रहे हैं, जिनसे समृद्धि का भ्रम होता है। सरकारों को आंकड़ों के मकड़जाल से निकलकर आम जनता की माली हालत सुधारने के प्रयास करने पर ध्यान देना चाहिए। - यशपाल यश, मानसरोवर, जयपुर
मिड डे मील हाल ही में राज्य के एक विद्यालय में विद्यार्थियों को परोसे गए मिड डे मील की दाल में मरा हुआ चूहा मिला। इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। स्कूलों में भोजन के बाद बच्चे अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। जाहिर है कि विद्यार्थियों को दिए जा रहे भोजन में किस हद तक लापरवाही बरती जा रही है। ऎसा लगता है कि मिड डे मील के दौरान सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान ही नहीं दिया जाता। मिड डे मील के तहत दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता के बारे में सख्त दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा। बेहतर तो यह है कि बच्चों को भोजन के स्थान पर मूंगफली, चने, बिस्किट या ताजा फल दिए जाएं। - राजेंद्र गुप्ता छिंदी, सांगानेर, जयपुर
बढ़ता भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार से सभी त्रस्त हैं, लेकिन यह सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही जा रहा है। नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। इन घोटालों से स्पष्ट है कि जनता को किस कदर लूटा जा रहा है। यह लूट बंद होनी चाहिए। सरकार में शामिल मंत्री तक इस लूट में शामिल हैं। ऎसे में सवाल यह है कि यह लूट बंद कैसे हो? जब तक जनता नहीं जागेगी यह लूट बंद होने वाली नहीं। - रमाशंकर शर्मा, अग्रवाल फार्म, जयपुर
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